Monday, June 30, 2025

"सांसा क्रोमा": सामूहिक देखभाल का एक गीत


"सांसा क्रोमा" घाना के अक्कान समुदाय का एक पारंपरिक बाल गीत है, जो गहराई से भाव और सांस्कृतिक ज्ञान से भरा हुआ है। इस गीत का नाम ही — सांसा (बाज़) और क्रोमा (एक प्रकार का पक्षी) — एक युवा बाज़ की कहानी कहता है, जो खो जाता है लेकिन समुदाय द्वारा प्रेमपूर्वक उसकी माँ के पास वापस लाया जाता है।

गीत के बोलों का अर्थ कुछ इस प्रकार है:

"सांसा क्रोमा, तुम अनाथ हो।

तुम उड़ते जाओगे, उड़ते जाओगे — लेकिन खोओगे नहीं।

समुदाय तुम्हें पाल लेगा।"

यह एक कोमल आश्वासन है कि कोई भी बच्चा वास्तव में अकेला नहीं होता — माता-पिता के अभाव में भी, पूरा गाँव उसकी देखभाल के लिए तैयार होता है।

क्या बदल रहा है?

आधुनिक जीवन ने पालन-पोषण को बहुत निजी बना दिया है। अब कई युवा परिवार अपने रिश्तेदारों से दूर बच्चों को पालते हैं, जहाँ आत्मनिर्भरता को संबंधों से अधिक महत्व दिया जाता है। हमारे सामाजिक दायरे छोटे हो गए हैं। हम स्वतंत्रता और निजता चाहते हैं, लेकिन इसकी क़ीमत यह है कि बच्चे उन कई व्यक्तियों और आवाज़ों से वंचित हो जाते हैं जो कभी उन्हें आकार देती थीं।

एक और कारण यह है कि आज की पीढ़ी में बुजुर्गों के प्रति अविश्वास बढ़ा है। आज के युवा माता-पिता, आधुनिक जानकारी और तकनीक से सुसज्जित होकर, अक्सर मानते हैं कि वे सबसे बेहतर जानते हैं — और बहुत हद तक यह सही भी है। लेकिन जब हम बुजुर्गों से पूरी तरह मुंह मोड़ लेते हैं, तो हम उन अनुभवों से सीखी गई बुद्धिमत्ता को भी त्याग देते हैं — जो न किताबों में मिलती है और न ही स्क्रीन पर।

समुदाय अब भी क्यों ज़रूरी है?

यदि कोई बच्चा केवल एक या दो व्यक्तियों द्वारा पाला जाता है, तो वह जीवन का एक सीमित रूप सीखता है। लेकिन समुदाय में बच्चों को जीवन जीने, सहने और बढ़ने के कई तरीके देखने को मिलते हैं।

एक दादा धैर्य सिखा सकते हैं, एक चाचा संकल्प की मिसाल बन सकते हैं, और एक पड़ोसी उदारता का पाठ पढ़ा सकता है।

ऐसे बच्चे जो बुजुर्गों और विस्तारित परिवार के बीच बड़े होते हैं, उनमें अक्सर भावनात्मक समझ और अनुकूलन क्षमता अधिक होती है। उन्हें एक गहरे जुड़ाव का अहसास होता है — यह आत्मविश्वास कि जीवन, चाहे अनिश्चित हो, कई हाथों में थामा गया है।

क्या हम फिर से वह "गाँव" बन सकते हैं?

"सांसा क्रोमा" हमसे एक कोमल लेकिन महत्वपूर्ण सवाल पूछता है:

क्या हम अब भी अपने बच्चों से यह वादा कर सकते हैं कि वे कभी खोएंगे नहीं — क्योंकि हम उन्हें खोजने के लिए मौजूद हैं?

आइए हम याद करें कि पालन-पोषण कभी अकेले करने की चीज़ नहीं थी। आइए हम एक-एक संबंध को फिर से जोड़कर अपने समुदाय की भावना को पुनः जीवित करें — अपने बच्चों के लिए, और हम सभी के चंगे होने के लिए।

 

Author: Fr. John Baptist OFM Cap.

Translator: Sr. Ekta Stephen FSLG

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