नमस्कार मित्रों,
आज हम एक बहुत सुंदर और गहरी सच्चाई पर मनन करेंगे।
जब परमेश्वर हमसे बिना शर्त प्यार करता है — चाहे हम अच्छे हों या बुरे —
तो फिर हमें अच्छा बनने की क्या ज़रूरत है? यह सवाल बहुत लोगों के मन में आता है।
रोनाल्ड रोलहाइज़र इसका उत्तर बहुत सुंदर तरीके से देते हैं। वे कहते हैं:
"अगर परमेश्वर हमें तब भी प्यार करता है जब हम गलतियाँ करते हैं, और तब भी जब हम सही चलते हैं, तो फिर हम अच्छे क्यों बनें? असली प्रेम कोई इनाम नहीं है। प्रेम के कारण ही हम अच्छे बनते हैं। हमें इसलिए प्यार नहीं किया जाता क्योंकि हम अच्छे हैं, बल्कि जब हमें सच्चा प्रेम मिलता है,
तो हम अच्छे बनने लगते हैं।"
यह सच्चाई हमारे सोचने का तरीका बदल देती है। अगर प्रेम कोई सौदा है — कि हम अच्छे होंगे तभी हमें प्रेम मिलेगा तो वह प्रेम नहीं, व्यापार है। पर परमेश्वर का प्रेम ऐसा नहीं है। वह हमें वैसे ही अपनाता है जैसे हम हैं। जब हम यह प्रेम गहराई से महसूस करते हैं,
तो हमारे अंदर एक बदलाव आता है। हम धीरे-धीरे वैसा ही प्रेम दूसरों को देना चाहते हैं।
इनाम और सज़ा से हम केवल थोड़ी देर तक अच्छे बन सकते हैं। लेकिन असली परिवर्तन केवल प्रेम से होता है। परमेश्वर का प्रेम हमें ज़बरदस्ती नहीं बदलता —
वह हमारे अंदर की अच्छाई को बाहर लाता है।
जब हमें यह समझ आता है कि हम पहले से ही पूरी तरह प्रेम किए गए हैं, तो हम खुद को नई दृष्टि से देखने लगते हैं। ना कि जैसे कोई काम अधूरा है,
बल्कि जैसे कोई प्रिय संतान है, जिसे धीरे-धीरे पूर्णता की ओर बढ़ना है। यहाँ अच्छाई कोई बोझ नहीं लगती — बल्कि एक फल है उस प्रेम का, जिसे हमने पहले ही पा लिया है।
धन्यवाद!
आप इस प्रेम को जानें, उसमें जिएं, और दूसरों तक पहुँचाएँ।
Writer: Fr. John Baptist OFM Cap.
Translators: Sr. Ekta FSLG & Sr. Catherine Lakra CMC
नोट्स:
- Rolheiser, R. (2014). Sacred fire: A vision for a deeper human and Christian maturity (p. 118).
- यूहन्ना 3:16 — “क्योंकि परमेश्वर ने संसार से ऐसा प्रेम किया कि उसने अपने इकलौते पुत्र को दे दिया।”
- रोमियों 5:8 — “जब हम पापी ही थे, तब मसीह ने हमारे लिए प्राण दे दिए।”
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