जरा सोचिए दोस्तो, हमारी यादें एक बैग की तरह हैं जिसे हम हमेशा अपने साथ लेकर चलते हैं। इस बैग में कुछ यादें फूलों जैसी हल्की होती हैं, जिन्हें सोचकर चेहरेपर मुस्कान आ जाती है। और कुछ यादें पत्थर जैसी भारी होती हैं, जो हमें आगे बढ़ने से रोकती हैं।
हम आज जो भी हैं, अपनी इन्हीं यादों की वजह से हैं। कोई अच्छी याद हमें हिम्मत देती है, तो कोई बुरी याद हमें डरा देती है या किसी पर भरोसा करने से रोकती है।हमारी सोच, हमारी आदतें, यहाँ तक कि हमारे रिश्ते भी इन्हीं यादों से बनते हैं।
पर सबसे ज़रूरी बात यह है कि हम इस बैग के गुलाम नहीं हैं। हम इसके मालिक हैं।
हमें बस हिम्मत करके इस बैग को खोलकर देखना है। कौन सी यादें हमें खुशी दे रही हैं? उन्हें संभालकर रखें। कौन सी यादें हमें दुख दे रही हैं? उनसे सीखें और फिरउन्हें प्यार से अलविदा कह दें। उन भारी पत्थरों को बैग से निकालने का समय आ गया है।
जब हम ऐसा करते हैं, तो यही यादें बोझ नहीं, बल्कि हमारा सहारा बन जाती हैं। वे हमें सिखाती हैं, लेकिन हम पर हावी नहीं होतीं। हम हल्का और आज़ाद महसूसकरते हैं।
जैसा कि कार्ल जंग ने बहुत खूब कहा है:
"जब तक आप अपने मन की उन बातों को नहीं समझते जो आपसे छिपी हैं, तब तक वही आपकी ज़िंदगी चलाती रहेंगी और आप उसे अपनी किस्मत कानाम देते रहेंगे।"
No comments:
Post a Comment