Monday, July 7, 2025

यादों की ताकत


जरा सोचिए दोस्तोहमारी यादें एक बैग की तरह हैं जिसे हम हमेशा अपने साथ लेकर चलते हैं। इस बैग में कुछ यादें फूलों जैसी हल्की होती हैंजिन्हें सोचकर चेहरेपर मुस्कान  जाती है। और कुछ यादें पत्थर जैसी भारी होती हैंजो हमें आगे बढ़ने से रोकती हैं।

हम आज जो भी हैंअपनी इन्हीं यादों की वजह से हैं। कोई अच्छी याद हमें हिम्मत देती हैतो कोई बुरी याद हमें डरा देती है या किसी पर भरोसा करने से रोकती है।हमारी सोचहमारी आदतेंयहाँ तक कि हमारे रिश्ते भी इन्हीं यादों से बनते हैं।

पर सबसे ज़रूरी बात यह है कि हम इस बैग के गुलाम नहीं हैं। हम इसके मालिक हैं।

हमें बस हिम्मत करके इस बैग को खोलकर देखना है। कौन सी यादें हमें खुशी दे रही हैंउन्हें संभालकर रखें। कौन सी यादें हमें दुख दे रही हैंउनसे सीखें और फिरउन्हें प्यार से अलविदा कह दें। उन भारी पत्थरों को बैग से निकालने का समय  गया है।

जब हम ऐसा करते हैंतो यही यादें बोझ नहींबल्कि हमारा सहारा बन जाती हैं। वे हमें सिखाती हैंलेकिन हम पर हावी नहीं होतीं। हम हल्का और आज़ाद महसूसकरते हैं।

जैसा कि कार्ल जंग ने बहुत खूब कहा है:

"जब तक आप अपने मन की उन बातों को नहीं समझते जो आपसे छिपी हैंतब तक वही आपकी ज़िंदगी चलाती रहेंगी और आप उसे अपनी किस्मत कानाम देते रहेंगे।"

 

Writer: Fr. John Baptist OFM Cap.

Translator: Sr. Ekta Stephen FSLG

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