हाय दोस्तों,
आज दिल से एक बात करनी है — दर्द के बारे में। हाँ वही दर्द, जो हर किसी ने कभी न कभी महसूस किया है। चोट लगती है, जल जाते हैं, कभी दिल टूटता है — तो दर्द तो होता ही है। और ये सिर्फ हमें नहीं होता — जानवरों को भी होता है। सब जीवित प्राणियों को होता है। परफर्क ये है कि हम इंसान दर्द को बस महसूस नहीं करते, हम उसके बारे में सोचते हैं, सवाल करते हैं।
“ये क्यों हुआ?”
“मेरे साथ ही क्यों?”
“इसका कोई मतलब भी है या नहीं?”
ज्ञानी पुरुष कुशनर — एक बात कहते हैं जो दिल को छू जाती है। वो कहते हैं —
सोचो दो तरह के दर्द के बारे में:
एक — बच्चे को जन्म देने का दर्द।
दूसरा — किडनी स्टोन का दर्द।
दोनों बहुत तकलीफ देते हैं, पर फर्क ये है — बच्चा पैदा होने वाला है, एक नया जीवन आ रहा है,
तो एक माँ वो दर्द सह लेती है — खुशी-खुशी। क्योंकि वो जानती है कि ये दर्द किसी अच्छे चीज़ का रास्ता है। लेकिन किडनी स्टोन वालादर्द? बस दर्द ही है। न कोई मतलब, न कोई उम्मीद।
तो कुशनर कहते हैं — “दर्द वो कीमत है जो हम ज़िंदा रहने के लिए चुकाते हैं।”
सोचो — जो मरे हुए हैं, उन्हें कुछ महसूस नहीं होता। जब हम किसी दर्द — चाहे वह शारीरिक हो या भावनात्मक — को अर्थ देने के नज़रियासे देखते हैं, तो हमारा ध्यान बदल जाता है।
“ये क्यों हो रहा है?” पूछने के बजाय
हम पूछना शुरू “करते हैं” —
“इस दर्द से मैं क्या सीख सकता हूँ?”
“क्या ये दर्द मुझे और गहराई से जीना सिखा रहा है ?”
दर्द तो सबको होता है — लेकिन कोई उस दर्द में टूट जाता है, और कोई उसी दर्द से मजबूत बन जाता है। और ये हम पर है — कि हम उस दर्दको खाली पीड़ा बनाएं, या एक ऐसा सफ़र, जो हमें कुछ सिखा जाए, थोड़ा और इंसान बना जाए।
तो अगली बार जब कुछ चुभे, कुछ बुरा लगे, या आँसू निकल आएं — थोड़ा रुकिए, साँस लीजिए, और खुद से पूछिए:
“क्या ये दर्द मुझे थोड़ा और इंसान बना सकता है?”
बस इतनी सी बात थी आज — दिल से दिल तक। अगर अच्छा लगा, तो किसी दोस्त से ज़रूर शेयर करना — क्योंकि सबको कभी न कभी ये सुनने की ज़रूरत होती है
Writer: Fr. John Baptist OFM Cap.
Translator: Sr. Ekta Stephen FSLG
Notes
Kushner H. S. (1981). When bad things happen to good people (pp. 72-73). Anchor Books.
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