Sunday, July 13, 2025

आत्मा दर्द में अर्थ खोजती है


हाय दोस्तों,
आज दिल से एक बात करनी है — दर्द के बारे में। हाँ वही दर्दजो हर किसी ने कभी  कभी महसूस किया है। चोट लगती हैजल जाते हैंकभी दिल टूटता है — तो दर्द तो होता ही है। और ये सिर्फ हमें नहीं होता — जानवरों को भी होता है। सब जीवित प्राणियों को होता है। परफर्क ये है कि हम इंसान दर्द को बस महसूस नहीं करतेहम उसके बारे में सोचते हैंसवाल करते हैं।
ये क्यों हुआ?”
मेरे साथ ही क्यों?”
इसका कोई मतलब भी है या नहीं?”

ज्ञानी पुरुष कुशनर — एक बात कहते हैं जो दिल को छू जाती  है। वो कहते हैं —
सोचो दो तरह के दर्द के बारे में:
एक — बच्चे को जन्म देने का दर्द।
दूसरा — किडनी स्टोन का दर्द।

दोनों बहुत तकलीफ देते हैंपर फर्क ये है — बच्चा पैदा होने वाला हैएक नया जीवन  रहा है,
तो एक माँ वो दर्द सह लेती है — खुशी-खुशी। क्योंकि वो जानती है कि ये दर्द किसी अच्छे चीज़ का रास्ता है। लेकिन किडनी स्टोन वालादर्दबस दर्द ही है।  कोई मतलब कोई उम्मीद।

तो कुशनर कहते हैं — दर्द वो कीमत है जो हम ज़िंदा रहने के लिए चुकाते हैं।
सोचो — जो मरे हुए हैंउन्हें कुछ महसूस नहीं होता। जब हम किसी दर्द — चाहे वह शारीरिक हो या भावनात्मक — को अर्थ देने के नज़रियासे देखते हैंतो हमारा ध्यान बदल जाता है। 

ये क्यों हो रहा है?” पूछने के बजाय
हम पूछना शुरू “करते हैं”  —
इस दर्द से मैं क्या सीख सकता हूँ?”
क्या ये दर्द मुझे और गहराई से जीना सिखा रहा है ?”

दर्द तो सबको होता है — लेकिन कोई उस दर्द में टूट जाता हैऔर कोई उसी दर्द से मजबूत बन जाता है। और ये हम पर है — कि हम उस दर्दको खाली पीड़ा बनाएंया एक ऐसा सफ़रजो हमें कुछ सिखा जाएथोड़ा और इंसान बना जाए।

तो अगली बार जब कुछ चुभेकुछ बुरा लगेया आँसू निकल आएं — थोड़ा रुकिएसाँस लीजिएऔर खुद से पूछिए:
क्या ये दर्द मुझे थोड़ा और इंसान बना सकता है?”

बस इतनी सी बात थी आज — दिल से दिल तक। अगर अच्छा लगातो किसी दोस्त से ज़रूर शेयर करना — क्योंकि सबको कभी  कभी ये सुनने की ज़रूरत होती है

Writer: Fr. John Baptist OFM Cap.

Translator: Sr. Ekta Stephen FSLG


Notes

Kushner H. S. (1981). When bad things happen to good people (pp. 72-73). Anchor Books.

 

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